भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 क्या हैं ? BNS Section 17 In Hindi

BNS Section 17 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 17 क्या हैं ( What is BNS Section 17 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 17 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 क्या हैं ? BNS Section 17 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थी उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 में विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ती द्वारा किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी गई है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 17 क्या हैं ( What is BNS Section 17 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 में विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ती द्वारा किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 के अनुसार कोई बात अपराध नहीं हैं, जो ऐसे व्यक्ती के द्वारा की जाए, जो उसे करने के लिए विधि द्वारा न्यायानुमत हो, या तथ्य की भूल के कारण, न कि विधि की भूल के कारण सद्भावपूर्वक विश्वास करता हो की वह उसे करने के लिए विधि द्वारा न्यायानुमत हैं।

दृष्टांत –

क, य को ऐसा कार्य करते देखता हैं, जो क को हत्या प्रतीत होता हैं। क सद्भावपूर्वक काम में लाए गए अपने श्रेष्ठ निर्णय के अनुसार उस शक्ती को प्रयोग में लाते हुए, जो विधि ने हत्याकारियों को उस कार्य में पकड़ने के लिए समस्त व्यक्तीयों को दे रखी हैं, य को उचित प्राधिकारियों के समक्ष ले जाने के लिए य को अभिगृहीत करता हैं। क ने कोई अपराध नहीं किया हैं, चाहे तत्पश्यात् असल बात यह निकले की य आत्म प्रतिरक्षा में कार्य कर रहा था।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 में विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ती द्वारा किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 के अनुसार कोई बात अपराध नहीं हैं, जो ऐसे व्यक्ती के द्वारा की जाए, जो उसे करने के लिए विधि द्वारा न्यायानुमत हो, या तथ्य की भूल के कारण, न कि विधि की भूल के कारण सद्भावपूर्वक विश्वास करता हो की वह उसे करने के लिए विधि द्वारा न्यायानुमत हैं।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 17 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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