भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 क्या हैं ? BNS Section 23 In Hindi

BNS Section 23 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 23 क्या हैं ( What is BNS Section 23 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 23 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 क्या हैं ?BNS Section 23 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थी उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 में ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मतता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ हैं इसके बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।‌

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 23 क्या हैं ( What is BNS Section 23 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 में ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मतता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ हैं इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 के अनुसार कोई बात अपराध नहीं हैं जो ऐसे व्यक्ती द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मतता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह की जो कुछ वह कर रहा हैं वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल हैं, जानने में असमर्थ हैं, परंतु यह तब जब की वह चीज, जिसमें उसकी मतता हुई थी, उसको अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के विरुद्ध दी गई थी।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 में ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मतता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ हैं इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 के अनुसार कोई बात अपराध नहीं हैं जो ऐसे व्यक्ती द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मतता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह की जो कुछ वह कर रहा हैं वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल हैं, जानने में असमर्थ हैं, परंतु यह तब जब की वह चीज, जिसमें उसकी मतता हुई थी, उसको अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के विरुद्ध दी गई थी।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 23 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए।‌ धन्यवाद !

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