भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 क्या हैं ? BNS Section 25 In Hindi

BNS Section 25 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 25 क्या हैं ( What is BNS Section 25 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 25 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 क्या हैं ? BNS Section 25 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 में सन्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो इसके बारे में जानकारी दी गई है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 25 क्या हैं ( What is BNS Section 25 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 में सन्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो इसके बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 के अनुसार कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो की उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना संभाव्य हैं, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं हैं जो उस बात से अठराह साल से अधिक आयु के व्यक्ति को, जिसने वह अपहानि सहन करने की चाहे अभिव्यक्त, चाहे विवक्षित सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित होना कर्ता द्वारा आशयित हो अथवा जिसके बारे में कर्ता को ज्ञात हो की वह उपर्युक्त जैसे किसी व्यक्ति को, जिसने उस अपहानि की जोखिम उठाने की सम्मति दे दी हैं, उस बात द्वारा कारित होनी संभाव्य हैं।

दृष्टांत –

क और य आमोदार्थ आपस में पटेबाजी करने को सहमत होते है। इस सहमति में किसी अपहानि को, जो ऐसी पटेबाजी में खेल के नियम के विरुद्ध न होते हुए कारीत हो, उठाने की हर एक को संमति विवक्षित हैं, और यदि क यथानियम पटेबाजी करते हुए य को उपहति कारित कर देता है, तो क कोई अपराध नहीं करता हैं।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 में सन्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो इसके बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 के अनुसार कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो की उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना संभाव्य हैं, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं हैं जो उस बात से अठराह साल से अधिक आयु के व्यक्ति को, जिसने वह अपहानि सहन करने की चाहे अभिव्यक्त, चाहे विवक्षित सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित होना कर्ता द्वारा आशयित हो अथवा जिसके बारे में कर्ता को ज्ञात हो की वह उपर्युक्त जैसे किसी व्यक्ति को, जिसने उस अपहानि की जोखिम उठाने की सम्मति दे दी हैं, उस बात द्वारा कारित होनी संभाव्य हैं।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 25 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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