भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 क्या हैं ? BNS Section 27 In Hindi

BNS Section 27 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 27 क्या हैं ( What is BNS Section 27 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 27 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 क्या हैं ? BNS Section 27 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 में संरक्षक द्वारा या उसकी संमति से शिशु या उन्मत व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 क्या है इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 27 क्या हैं ( What is BNS Section 27 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 में संरक्षक द्वारा या उसकी संमति से शिशु या उन्मत व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 के अनुसार कोई बात, जो बारह साल से कम आयु के या विकृतचित व्यक्ति के द्वारा, या की अभिव्यक्त या विवक्षित संमति से, की जाए, किसी ऐसी अपहानि के कारण, अपराध नहीं हैं जो उस बात से उस व्यक्ती को कारित हो, या कारित करने का कर्ता का आशय हो या कारित होने की संभाव्यता कर्ता को ज्ञात हो ;

परन्तुक-

क) इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;

ख) इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो की उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य हैं ;

ग) इस अपवाद का विस्तार स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा जब तक कि वह मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के, या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से न की गई हो ;

घ) इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं हैं।

दृष्टांत –

क यह व्यक्ती सद्भावपूर्वक, अपने शिशु के फायदे के लिए अपने शिशु की संमति के बिना, यह संभाव्य जानते हुए की शस्त्रकर्म से उस शिशु की मृत्यु कारित होगी, न कि इस आशय से की उस शिशु को मृत्यु कारित कर दे, शल्यचिकित्सक द्वारा पथरी निकलवाने के लिए अपने शिशु की शल्यक्रिया करवाता हैं। क का उद्देश्य शिशु को रोगमुक्त कराना था, इसलिए वह इस अपवाद के अंतर्गत आता है।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 में संरक्षक द्वारा या उसकी संमति से शिशु या उन्मत व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 27 क्या है इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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