भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 क्या हैं ? BNS Section 30 In Hindi

BNS Section 30 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 30 क्या हैं ( What is BNS Section 30 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 30 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 क्या हैं ? BNS Section 30 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 में संमति के बिना किसी व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 30 क्या हैं ( What is BNS Section 30 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 में संमति के बिना किसी व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 के अनुसार कोई बात जो किसी व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपि, उसकी संमति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ती को कारित हो जाए, अपराध नहीं हैं, यदि परिस्थितियां ऐसी हो की उस व्यक्ती के लिए यह असंभव हो की वह अपनी संमति प्रकट करें या वह व्यक्ति संमति देने के लिए असमर्थ हो और उसका कोई संरक्षक या उसका विधिपूर्ण भारसाधक कोई दूसरा व्यक्ती न हो जिससे ऐसे समय पर संमति अभिप्राप्त करना संभव हो की वह बात फायदे साथ की जा सके ;

परन्तुक-

क) इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;

ख) इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा, जिसे करने वाला व्यक्ती जानता हो की उससे मृत्यु कारीत होना संभाव्य हैं ;

ग) इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या उपहति के निवारण के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करने या उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;

घ) इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 में संमति के बिना किसी व्यक्ती के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 30 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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