भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 क्या हैं ? BNS Section 32 In Hindi

BNS Section 32 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 32 क्या हैं ( What is BNS Section 32 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 32 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 क्या हैं ? BNS Section 32 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 में वह कार्य, जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है इसके बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 क्या है इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 32 क्या हैं ( What is BNS Section 32 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 में वह कार्य, जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 के अनुसार हत्या और मृत्यु से दंडनीय उन अपराधों को जो राज्य के विरुद्ध हैं, छोड़कर कोई बात अपराध नहीं हैं, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए ऐसी धमकियों से विवश किया गया हो जिससे उस बात को करते समय उसको युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो गई हो की अन्यथा परिणाम यह होगा की उस व्यक्ती की तत्काल मृत्यु हो जाए :

परन्तु यह तब जब की उस कार्य को करने वाले व्यक्ती ने अपनी इच्छा से या तत्काल मृत्यु से कम अपनी अपहानि की युक्तियुक्त आशंका से अपने को उस स्थिती में न डाला हो, जिसमें की वह ऐसी मजबूरी के अधीन पड़ गया हैं।

स्पष्टीकरण 1 – वह व्यक्ती, जो स्वयं अपनी इच्छा से, या पीटे जाने की धमकी के वजह से, डाकुओं की टोली में उनके शील को जानते हुए सम्मलित हो जाता हैं, इस आधार पर ही इस अपवाद का फायदा उठाने का हकदार नहीं की वह अपने साथियों के द्वारा ऐसी बात करने के लिए विवश किया गया था जो विधिना अपराध है।

स्पष्टीकरण 2 – डाकुओं की एक टोली द्वारा अभिगृहीत और तत्काल मृत्यु की धमकी द्वारा किसी बात के करने के लिए, जो विधिना अपराध हैं, विवश किया गया व्यक्ती उदाहरणार्थ – एक लोहार को अपने औजार के मदद से एक घर का द्वार तोड़ने को विवश किया जाता हैं, जिससे डाकू उसमें प्रवेश कर सकें और उसे लूट सके, इस अपवाद का फायदा उठाने के लिए हकदार हैं।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 में वह कार्य, जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 क्या है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 के अनुसार हत्या और मृत्यु से दंडनीय उन अपराधों को जो राज्य के विरुद्ध हैं, छोड़कर कोई बात अपराध नहीं हैं, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए ऐसी धमकियों से विवश किया गया हो जिससे उस बात को करते समय उसको युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो गई हो की अन्यथा परिणाम यह होगा की उस व्यक्ती की तत्काल मृत्यु हो जाए :
परन्तु यह तब जब की उस कार्य को करने वाले व्यक्ती ने अपनी इच्छा से या तत्काल मृत्यु से कम अपनी अपहानि की युक्तियुक्त आशंका से अपने को उस स्थिती में न डाला हो, जिसमें की वह ऐसी मजबूरी के अधीन पड़ गया हैं।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 32 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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