भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 क्या हैं ? BNS Section 35 In Hindi

BNS Section 35 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 35 क्या हैं ( What is BNS Section 35 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 35 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 क्या हैं ? BNS Section 35 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 में शरीर तथा संपत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 35 क्या हैं ( What is BNS Section 35 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 में शरीर तथा संपत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 के अनुसार धारा 40 में अंतर्विष्ट निर्बंधनों के अध्यधीन, हर व्यक्ती को अधिकार हैं की, वह –

क) मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ती के शरीर की प्रतिरक्षा करें ;

ख) किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाषा में आने वाला अपराध हैं, या जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार करने का प्रयत्न हैं, अपनी या किसी अन्य व्यक्ती की, चाहे जंगम, चाहे स्थावर संपत्ति की प्रतिरक्षा करें।

अब इस धारा को हम आपको आसान भाषा में समझाते हैं। रमेश यह एक व्यक्ती हैं और वह रात के समय ऑफिस से घर लौट रहा था और उसने रास्ते में देखा की किसी दुसरे व्यक्ती के घर में चोर चोरी करने की कोशिश कर रहे हैं इसलिए उसने यह बात पुलिस को फोन करके बता दी। यह करके रमेश ने अन्य व्यक्ती के संपत्ति की रक्षा की हैं।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 में शरीर तथा संपत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 के अनुसार धारा 40 में अंतर्विष्ट निर्बंधनों के अध्यधीन, हर व्यक्ती को अधिकार हैं की, वह –
क) मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ती के शरीर की प्रतिरक्षा करें ;
ख) किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाषा में आने वाला अपराध हैं, या जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार करने का प्रयत्न हैं, अपनी या किसी अन्य व्यक्ती की, चाहे जंगम, चाहे स्थावर संपत्ति की प्रतिरक्षा करें।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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