भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 क्या हैं ? BNS Section 38 In Hindi

BNS Section 38 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 38 क्या हैं ( What is BNS Section 38 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 38 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 क्या हैं ? BNS Section 38 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 में शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता हैं इसके बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 38 क्या हैं ( What is BNS Section 38 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 में शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता हैं इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 के अनुसार शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्ववर्ती अंतिम धारा 37 में वर्णित निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक हैं, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता हैं, एतस्मिन्पश्चात् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का हैं, अर्थात :-

क) ऐसा हमला, जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो की अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा ;

ख) ऐसा हमला, जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो की अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;

ग) बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;

घ) प्रकृति-विरुद्ध काम-तृष्णा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला।

इ) व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;

च) इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ती का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारीत हो की वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ;

छ) अम्ल फेंकने या देने का कृत्य, या अम्ल फेंकने या देने का प्रयास करना जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो की ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप अन्यथा घोर उपहति कारित होगी।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 में शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता हैं इसके बारे में जानकारी दी है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 38 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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