भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 क्या हैं ? BNS Section 43 In Hindi

BNS Section 43 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 43 क्या हैं ( What is BNS Section 43 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 43 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 क्या हैं ? BNS Section 43 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 में संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहने के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 43 क्या हैं ( What is BNS Section 43 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 में संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहने के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 के अनुसार संपत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार –

क) तब प्रारंभ होता हैं, जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती हैं।

ख) संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकारियों की मदद अभिप्राप्त करने या संपत्ति पत्युदधृत हो जाने तक बना रहता है।

ग) संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उपहति, या सदोष अवरोध कारित करता रहता या कारित करने का प्रयास करता रहता हैं, अथवा जब तक तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता हैं।
घ) संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आपराधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आपराधिक अतिचार या रिष्टि करता रहता हैं।

ड) संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रौ गृह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गृह भेदन से आरंभ हुआ गृह-अतिचार होता रहता है।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 में संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहने के बारे में जानकारी दी है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 43 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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