भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 क्या हैं ? BNS Section 46 In Hindi

BNS Section 46 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 46 क्या हैं ( What is BNS Section 46 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 क्या हैं ? BNS Section 46 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 में दुष्प्रेरक के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 क्या है इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 46 क्या हैं ( What is BNS Section 46 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 में दुष्प्रेरक के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 के अनुसार वह व्यक्ती अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करता हैं या ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करता हैं, जो अपराध होता, यदी वह कार्य अपराध करने के लिए विधि अनुसार समर्थ व्यक्ती द्वारा उसी आशय या ज्ञान से, जो दुष्प्रेरक का हैं, किया जाता।

स्पष्टीकरण 1 – किसी कार्य के अवैध लोप का दुष्प्रेरण अपराध की कोटी में आ सकेगा, चाहे दुष्प्रेरक उस कार्य को करने के लिए स्वयं आबद्ध न हो।

स्पष्टीकरण 2 – दुष्प्रेरण का अपराध गठित होने के लिए वह आवश्यक नहीं हैं की दुष्प्रेरीत कार्य किया जाए या अपराध गठित करने के लिए अपेक्षित प्रभाव कारित हो।
स्पष्टीकरण 3 – यह आवश्यक नहीं हैं की दुष्प्रेरित व्यक्ती अपराध करने के लिए विधि अनुसार समर्थ हो, या उसका वही दूषित आशय या ज्ञान हो, जो दुष्प्रेरक का हैं, या कोई भी दूषित आशय या ज्ञान हो।

स्पष्टीकरण 4 – अपराध का दुष्प्रेरण अपराध होने के कारण ऐसे दुष्प्रेरण का दुष्प्रेरण भी अपराध हैं।

स्पष्टीकरण 5 – षड्यंत्र द्वारा दुष्प्रेरण का अपराध करने के लिए यह आवश्यक नहीं हैं की दुष्प्रेरक उस अपराध को करने वाले व्यक्ती के साथ मिलकर उस अपराध की योजना बनाए। यह प्रर्याप्त हैं की उस षड्यंत्र में सम्मलित हो जिसके अनुसरण में वह अपराध किया जाता हैं।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 में दुष्प्रेरक के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 के अनुसार वह व्यक्ती अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करता हैं या ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करता हैं, जो अपराध होता, यदी वह कार्य अपराध करने के लिए विधि अनुसार समर्थ व्यक्ती द्वारा उसी आशय या ज्ञान से, जो दुष्प्रेरक का हैं, किया जाता।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 46 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।‌

Categories BNS

Leave a Comment