भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 क्या हैं ? BNS Section 51 In Hindi

BNS Section 51 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 51 क्या हैं ( What is BNS Section 51 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 51 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 क्या हैं ? BNS Section 51 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 में दुष्प्रेरक का दायित्व जब तक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया हैं और उससे भिन्न कार्य किया गया हैं इसके बारे में जानकारी दी गई है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 51 क्या हैं ( What is BNS Section 51 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 में दुष्प्रेरक का दायित्व जब तक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया हैं और उससे भिन्न कार्य किया गया हैं इसके बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 के अनुसार जब किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता हैं, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो :

परन्तु यह तब जब की किया गया कार्य दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम था और उस उकसाहट के असर के अधीन या उस सहायता से या उस षड्यंत्र के अनुसरण में किया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है।

दृष्टांत –

क) एक शिशु को य के भोजन में विष डालने के लिए क उकसाता हैं, और उस प्रयोजन से उसे विष परिदत्त करता हैं। वह शिशु उस उकसाहट के परिणामस्वरूप भूल से म के भोजन में, जो य के भोजन के पास रखा हुआ है, विष डाल देता हैं। यहां, यदि वह शिशु क के उकसाने के असर के अधीन उस कार्य को कर रहा था, और किया गया कार्य उन परिस्थितियों में उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम हैं, तो क उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस शिशु को म के भोजन में विष डालने के लिए उकसाया हैं।

ख) ख को य का गृह जलाने के लिए क उकसाता है। ख उस गृह को आग लगा देता है और उसी समय वहां संपत्ति की चोरी करता हैं। क यद्यपि गृह को जलाने के दुष्प्रेरण का दोषी हैं, किंतु चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी नहीं हैं ; क्योंकी वह चोरी एक अलग कार्य थी और उस गृह जलाने का अधिसम्भाव्य परिणाम नहीं थी।

ग) ख और ग को बसे हुए गृह में अर्धरात्रि में लूट के प्रयोजन से भेदन करने के लिए क उकसाता हैं, और उनको उस प्रयोजन के लिए आयुध देता हैं। ख और ग वह गृह-भेदन करते हैं, और य द्वारा जो निवासियों में से एक हैं, प्रतिरोध किए जाने पर, य की हत्या कर देते हैं। यहां, यदि वह हत्या उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम थी, तो क हत्या के लिए उपबंधित दंड से दंडनीय हैं।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 में दुष्प्रेरक का दायित्व जब तक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया हैं और उससे भिन्न कार्य किया गया हैं इसके बारे में जानकारी दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 के अनुसार जब किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता हैं, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो :
परन्तु यह तब जब की किया गया कार्य दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम था और उस उकसाहट के असर के अधीन या उस सहायता से या उस षड्यंत्र के अनुसरण में किया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 51 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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