भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 क्या हैं ? BNS Section 52 In Hindi

BNS Section 52 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 52 क्या हैं ( What is BNS Section 52 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 52 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 क्या हैं ? BNS Section 52 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 में दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दंड से दंडनीय है इसके बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 52 क्या हैं ( What is BNS Section 52 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 में दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दंड से दंडनीय है इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 के अनुसार यदि वह कार्य, जिसके लिए दुष्प्रेरक धारा 51 के अनुसार दायित्व के अधीन है, दुष्प्रेरित कार्य के अतिरिक्त किया जाता है और वह कोई सुभिन्न अपराध गठित करता हैं, तो दुष्प्रेरक उन अपराधों में से हर एक के लिए दंडनीय नहीं है।

दृष्टांत –

ख को एक लोकसेवक द्वारा किए गए करस्थम् का बलपूर्वक प्रतिरोध करने के लिए क उकसाता है। ख परिणामस्वरूप उस करस्थम् का प्रतिरोध करता हैं। प्रतिरोध करने में ख करस्थम् का निष्पादन करने वाले आफिसर को स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है। ख ने करस्थम् का प्रतिरोध करने और स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के दो अपराध किए हैं।

इसलिए ख दोनों अपराधों के लिए दंडनीय हैं, और यदि क यह सम्भाव्य जानता था की उस करस्थम् का प्रतिरोध करने में ख स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, तो क भी उनमें से हर एक अपराध के लिए दंडनीय होगा।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 में दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दंड से दंडनीय है इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 के अनुसार यदि वह कार्य, जिसके लिए दुष्प्रेरक धारा 51 के अनुसार दायित्व के अधीन है, दुष्प्रेरित कार्य के अतिरिक्त किया जाता है और वह कोई सुभिन्न अपराध गठित करता हैं, तो दुष्प्रेरक उन अपराधों में से हर एक के लिए दंडनीय नहीं है।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 52 क्या है इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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