भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 क्या हैं ? BNS Section 53 In Hindi

BNS Section 53 In Hindi हॅलो‌ ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 53 क्या हैं ( What is BNS Section 53 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 53 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 क्या हैं ? BNS Section 53 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 में दुष्प्रेरित कार्य से बाधित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो इसके बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 क्या है इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 53 क्या हैं ( What is BNS Section 53 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 में दुष्प्रेरित कार्य से बाधित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 के अनुसार जबकी कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन हैं, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित करता हैं तब दुष्प्रेरक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन हैं, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परंतु यह तब जब की वह यह जानता था की दुष्प्रेरित कार्य से यह प्रभाव कारित होना संभाव्य हैं।

दृष्टांत –

य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता हैं। ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित करता हैं। परिणामत: य की मृत्यु हो जाती है। यहां, यदि क यह जानता था की दुष्प्रेरित घोर उपहति से मृत्यु कारित होना संभाव्य हैं, तो क हत्या के लिए उपबंधित दंड से दंडनीय है।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 में दुष्प्रेरित कार्य से बाधित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो इसके बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 क्या है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 के अनुसार जबकी कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन हैं, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित करता हैं तब दुष्प्रेरक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन हैं, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परंतु यह तब जब की वह यह जानता था की दुष्प्रेरित कार्य से यह प्रभाव कारित होना संभाव्य हैं।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 53 क्या है इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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