भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 क्या हैं ? BNS Section 55 In Hindi

BNS Section 55 In Hindi हॅलो ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 55 क्या हैं ( What is BNS Section 55 in Hindi) इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। पहले हमारे देश में भारतीय दंड संहिता यह कानून था। लेकिन अब इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। अभी संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों ने अब कानून का रूप लिया हैं। भारतीय दंड संहिता को अंग्रेजों ने लागू किया था। अंग्रेजों के समय से भारत में भारतीय दंड संहिता लागू थी।

BNS Section 55 In Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 क्या हैं ? BNS Section 55 In Hindi

अंग्रेजों के काल से जो आपराधिक कानून भारत में लागू थे उनकी जगह लेने वाले तीन संशोधन विधेयकों पर कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ली हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 में मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध के दुष्प्रेरण के बारे में जानकारी दी है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 क्या हैं इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी यह पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।

भारतीय न्याय संहिता (Bhartiya Nyay Sanhita) की धारा 55 क्या हैं ( What is BNS Section 55 in Hindi) ?-

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 में मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध के दुष्प्रेरण के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 के अनुसार

1) जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दंड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबंध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात साल तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

2) यदि ऐसा कोई कार्य कर दिया जाए, जिसके लिए दुष्प्रेरक उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दायित्व के अधीन हो और जिससे किसी व्यक्ती को उपहति कारित हो, तो दुष्प्रेरक दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह साल की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

दृष्टांत –

ख को य की हत्या करने के लिए क उकसाता हैं। वह अपराध नहीं किया जाता हैं। यदि य की हत्या ख कर देता हैं, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास के दंड से दंडनीय होता। इसलिए, क कारावास से, जिसकी अवधि सात साल तक की हो सकेगी, दंडनीय हैं और जुर्माने से भी दंडनीय हैं ; और यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप य को कोई उपहति हो जाती हैं, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि चौदह साल तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

FAQ

भारतीय न्याय संहिता में कितनी धारा हैं ?

भारतीय न्याय संहिता में 356 धारा हैं।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 में किस बारे में जानकारी दी गई है ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 में मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध के दुष्प्रेरण के बारे में जानकारी दी है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 क्या हैं ?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 के अनुसार
1) जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दंड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबंध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात साल तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
2) यदि ऐसा कोई कार्य कर दिया जाए, जिसके लिए दुष्प्रेरक उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दायित्व के अधीन हो और जिससे किसी व्यक्ती को उपहति कारित हो, तो दुष्प्रेरक दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह साल की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 55 क्या हैं इसके बारे में जानकारी दी है। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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