भारतीय दंड संहिता की धारा 104 क्या हैं ? IPC Section 104 In Hindi

IPC Section 104 In Hindi हॅलो ! इस पोस्ट में हम आपको भारतीय दंड संहिता की धारा 104 के बारे में जानकारी दी हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 104 में ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से अलग कोई अपहानी कारीत करने तक का कब होता हैं इसके बारे में जानकारी दी हैं। इस पोस्ट में हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं।

IPC Section 104 In Hindi

भारतीय दंड संहिता की धारा 104 क्या हैं ? IPC Section 104 In Hindi

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 104 क्या हैं ?-

भारतीय दंड संहिता की धारा 104 में ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से अलग कोई अपहानी कारीत करने तक का कब होता हैं इसके बारे में जानकारी दी हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 104 के अनुसार “अगर वह अपराध , जो किए जाने का प्रयास या जो अपराध किए जाने पर प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल का अवसर आ जाता आता हैं , ऐसी रिष्टी, आपराधिक अतिचार या चोरी , जो पूर्वगामी आखिरी धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का नहीं हो , तो उस अधिकार का विस्तार स्वेच्छ्या मृत्यु कारीत करने तक का नहीं होता, परंतु इसका विस्तार धारा 99 में वर्णित किए गए निबंधनों के अधीन दोषकर्ता के मृत्यु से अलग कोई अपहानी स्वेच्छ्या कारीत करने तक का होता हैं।”

इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय दंड संहिता की धारा 104 के बारे में जानकारी दी हैं। हमारी इस पोस्ट को शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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