सिविल लाॅ क्या हैं? What Is Civil Law In Hindi

What Is Civil Law In Hindi हॅलो ! इस पोस्ट में हम आपको सिविल लाॅ क्या हैं इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। हमारे देश में बहुत प्रकार के कानून हैं जैसे की क्रिमिनल लाॅ, सिविल लाॅ, कंपनी लाॅ, प्राॅपर्टी लाॅ, सायबर लाॅ आदी। हमारे देश में जो अपराध होते हैं वह जिस कानून के अंतर्गत आते हैं उस कानून के अंतर्गत उस मामले में कार्यवाही की जाती हैं।

What Is Civil Law In Hindi

सिविल लाॅ क्या हैं? What Is Civil Law In Hindi

समाज के लोगों के बीच में कोई विवाद, विवाह के विवाद , संगठन के बीच के विवाद, नीजी मामले इस तरह के मामले सिविल लाॅ में आते हैं। अगर बिजनेस में आपके साथ कोई धोखा करता हैं तो इस तरह के मामले सिविल लाॅ के अंतर्गत आते हैं। इस तरह के मामले में केस करके आप मुआवजा मांग सकते हैं। सिविल लाॅ के बारे में पुरी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी पोस्ट अंत तक जरुर पढ़े।

सिविल लाॅ क्या हैं ? –

समाज के लोगों के बीच में कोई विवाद, विवाह के विवाद , संगठन के बीच के विवाद, नीजी मामले इस तरह के मामले सिविल लाॅ में आते हैं। अगर बिजनेस में आपके साथ कोई धोखा करता हैं तो इस तरह के मामले सिविल लाॅ के अंतर्गत आते हैं। इस तरह के मामले में केस करके आप मुआवजा मांग सकते हैं। जो वकील इस तरह के केस लड़ते हैं उनको सिविल लाॅयर कहा जाता हैं। सिविल कानून के अंतर्गत सजा नहीं दी जाती। इस मामले में एक पार्टी को दुसरे पार्टी को मुआवजा देना पड़ता हैं।

मान लीजिए की महेश ने एक जमीन खरीदी हैं और कुछ दिन बाद मंगेश यह बोलता हैं की यह जमीन मैने खरीदी हैं। यह मामला सिविल लाॅ के अंतर्गत आता हैं और यह मामला सिविल कोर्ट में चलेगा। सिविल कोर्ट के न्यायाधीश यह तय करेंगे की यह जमीन महेश ने खरीदी हैं की मंगेश ने।

सिविल लाॅ में कौन कोनसे विषय आते हैं ? –

सिविल लाॅ में बहुत विषयों का समावेश होता हैं जैसे की,

  • लेबर लाॅ
  • मिडिया लाॅ
  • इन्श्युरन्स लाॅ
  • सिक्युरिटीज लाॅ
  • टॅक्स लाॅ
  • आयपीआर ॲंड पॅटेंट लाॅ
  • बिजनेस लाॅ
  • इंडस्ट्रियल लाॅ
  • प्राॅपर्टी लाॅ
  • फॅमिली लाॅ
  • काॅन्स्टिट्युशनल लाॅ
  • एनवायरमेंटल लाॅ आदी

सिविल लाॅ और क्रिमिनल लाॅ में अंतर –

सिविल लाॅ को दिवानी कानून और नागरिक कानून इस नाम से भी जाना जाता है। अपराध के अलावा अन्य मामले दिवानी कानून के अंतर्गत आते हैं। उदा. संपत्ति के मामले, पारिवारिक मामले आदी। अगर मकान मालिक और किराएदार के बीच में कोई विवाद हैं तो वह भी दिवानी कानून के अंतर्गत आता हैं। इन मामलों में आप सिधे जाकर ट्रिब्यूनल में या कोर्ट में केस दर्ज कर सकते हैं। दिवानी कानून में सिर्फ विरुद्ध पार्टी को मुआवजा देना पड़ता हैं। इन मामलों में कोई भी सजा नहीं दी जाती।

क्रिमिनल लाॅ को हिंदी में फौजदारी कानून कहा जाता हैं।क्रिमिनल लाॅ अपराध के संबंधित कानून हैं। फौजदारी कानून का उपयोग अपराधियों को सजा देने‌ के लिए किया जाता हैं। अपराधी जो अपराध करते हैं उनको भारतीय दंड संहिता के अनुसार सजा कोर्ट के द्वारा दी जाती हैं। इस कानून के वजह से नागरिकों का शारीरिक नुकसान से संरक्षण होता हैं। फौजदारी कानून उन अपराधों से संबंधित हैं जो समाज के विरुद्ध किए जाते हैं।

फौजदारी कानून ऐसे अपराधों से संबंधित हैं जिन अपराधों के वजह से समाज,भुमी, राज्य के लिए खतरा हैं। जैसे की, हत्या, हत्या का प्रयास,चोरी, बलात्कार सबुत मिटाना आदी। इन अपराधों की केस सिधे कोर्ट में दर्ज नहीं कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करनी पड़ती हैं। इसके बाद पुलिस आपके केस की जांच पड़ताल करते हैं‌ इसके बाद ही कोर्ट में केस दर्ज की जा सकती हैं। इन मामलों में सजा, जुर्माना या सजा और जुर्माना दोनों भी दिए जाते हैं।

सिविल लाॅयर कैसे बनें ? –

  • अगर आप सिविल लाॅयर बनना चाहते हैं तो आपको 12 th या ग्रेजुएशन पुरा करना होगा। आप 12 th या ग्रेजुएशन किसी भी स्ट्रिम से ( science , commerce, arts में से कोई भी स्ट्रिम) पुरा कर सकते हैं। इसके बाद आप LLB के लिए एडमिशन ले सकते हैं।
  • LLB के लिए एडमिशन लेने के लिए कुछ युनिवर्सिटी में एंट्रेंस एग्जाम देनी पड़ती हैं तो कुछ युनिवर्सिटी में डाइरेक्ट 12 th या ग्रेजुएशन के मार्क्स पर एडमिशन दिया जाता हैं।
  • अगर आप 12 th के बाद एडमिशन लेते हैं तो आपको पांच साल का LLB का कोर्स करना पड़ता हैं। अगर आप ग्रेजुएशन के बाद LLB के लिए एडमिशन लेते हैं तो आपको 3 साल का LLB का कोर्स करना पड़ता है।
  • आप सिविल लाॅयर बनना चाहते हैं तो आपको सिविल लाॅ इस विषय की अच्छे से पढ़ाई करनी होगी।
  • आपका कोर्स पूरा होने के बाद आपको AIBE की एग्जाम देनी होती हैं। इस एग्जाम में पास होने के बाद आप एडवोकेट बन जाते हैं। इसके बाद आप कोर्ट में केस लड़ सकते हैं।
  • अगर आप LLB कोर्स के दुसरे या तिसरे साल से ही किसी अच्छे सिविल लाॅयर के साथ प्रेक्टिस करते हैं तो आप बहुत ही जल्दी अच्छे सिविल लाॅयर बन सकते हैं।

सिविल लाॅ में करियर –

सिविल लाॅ पुरा करने के बाद हमारे सामने करियर के बहुत विकल्प होते हैं जैसे की –

  • सिविल लाॅ सलाहकार
  • सिविल लाॅ ॲडवोकेट
  • सिविल लाॅ प्रोफेसर
  • सिविल लाॅ फर्म में नौकरी
  • जज
  • सिविल लाॅ लेखक

निष्कर्ष:

सिविल कानून एक कानूनी प्रणाली है जो मुख्य भूमि यूरोप में उत्पन्न हुई और दुनिया भर में अपनाई गई। नागरिक कानून प्रणाली को रोमन कानून के ढांचे के भीतर बौद्धिक रूप दिया गया है, और मूल सिद्धांतों को एक संदर्भ योग्य प्रणाली में संहिताबद्ध किया गया है, जो कानून के प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करता है।

FAQ:

सिविल कानून का क्या अर्थ है?

नागरिक कानून किसी देश के कानूनों के समूह का हिस्सा है जो अपराध के बजाय नागरिकों के निजी मामलों से संबंधित है, उदाहरण के लिए विवाह और संपत्ति के स्वामित्व।

नागरिक कानून क्या है उदाहरण सहित ?

नागरिक कानून ऐसे व्यवहार से संबंधित है जो किसी व्यक्ति या निगम जैसी अन्य निजी पार्टी को चोट पहुंचाता है। उदाहरण हैं मानहानि (अपमान और बदनामी सहित), अनुबंध का उल्लंघन, लापरवाही जिसके परिणामस्वरूप चोट या मृत्यु, और संपत्ति क्षति।

सिविल क़ानून क्यों हैं?

नागरिक कानून में व्यक्तियों के निजी अधिकारों को नियंत्रित करने वाले प्रावधान हैं। ऐसे कानून तब लागू होते हैं जब कानूनी रिश्ते के तहत किसी भी पक्ष द्वारा सहमत नियमों और शर्तों के उल्लंघन के संबंध में दो या दो से अधिक पार्टियों या संस्थाओं के बीच विवाद होता है।

भारत में नागरिक कानून क्या है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, सिविल कानून में नियमों और विनियमों का समूह शामिल होता है जो गैर-आपराधिक प्रकृति के विवादों को सुलझाने में मदद करता है।

भारत में सामान्य नागरिक कानून क्या है?

समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि समाज के सभी वर्गों, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, के साथ राष्ट्रीय नागरिक संहिता के अनुसार समान व्यवहार किया जाएगा, जो सभी पर समान रूप से लागू होगा।

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