ताज ट्रेपेजियम केस क्या हैं ? What Is Taj Trapezium Hair?

What Is Taj Trapezium Hair? हॅलो ! इस पोस्ट में हम आपको एमसी मेहता बनाम भारत संघ (ताज ट्रेपेजियम केस), 1986 केस क्या हैं इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। इस केस को ताज ट्रेपेजियम केस इस नाम से भी जाना जाता है। ताज ट्रेपेजियम का क्षेत्र 10,400 वर्ग किमी का हैं। ताज महल के चारों ओर ट्रेपेजियम के आकार का क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र पांच जिलों में फैला हुआ हैं।

What Is Taj Trapezium Hair?

ताज ट्रेपेजियम केस क्या हैं ? What Is Taj Trapezium Hair?

ताजमहल दुनिया के सबसे लोकप्रिय और खुबसूरत क्षेत्रों में से एक हैं। युनेस्को ने 1983 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। 1984 में एमसी मेहता ताजमहल दौरा करने के लिए गए थे तब उन्होंने देखा की ताजमहल का संगमरमर पिला हो रहा हैं। इसलिए एमसी मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में ताजमहल के संबंधित याचिका दाखिल की थी। ताज ट्रेपेजियम केस के बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी पोस्ट अंत तक जरुर पढ़िए।‌

ताज ट्रेपेजियम केस क्या हैं ?-

ताज ट्रेपेजियम केस ताजमहल से संबंधित महत्वपूर्ण केस हैं। ताज ट्रेपेजियम का क्षेत्र 10,400 वर्ग किमी का हैं। ताज महल के चारों ओर ट्रेपेजियम के आकार का क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र पांच जिलों में फैला हुआ हैं। ताजमहल दुनिया के सबसे लोकप्रिय और खुबसूरत क्षेत्रों में से एक हैं।

युनेस्को ने 1983 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। 1984 में एमसी मेहता ताजमहल दौरा करने के लिए गए थे तब उन्होंने देखा की ताजमहल का संगमरमर पिला हो रहा हैं। इसलिए एमसी मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में ताजमहल के संबंधित याचिका दाखिल की थी।

ताज ट्रेपेजियम केस के तथ्य –

  • याचिकाकर्ता का कहना यह हैं की ताजमहल को नुकसान मथुरा के रासायनिक उद्योग, फाउंड्री और रिफाइनरी के वजह से हो रहा है। प्रदुषक तत्वों से ताजमहल की हालत बिघड रही थी इस वजह से याचिकाकर्ता एम.सी.मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
  • याचिकाकर्ता ने इस बात का उल्लेख किया की मथुरा रिफाइनरी और आसपास के उद्योगों से सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो रहा है इस वजह से ऍसिड वर्षा होती हैं। इस वजह से ताजमहल के सुंदरता को बिगाड़ने की मुख्य वजह उद्योगों के द्वारा उत्सर्जित प्रदुषक ही हैं।
  • एसिड वर्षा का ताजमहल के संगमरमर पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा हैं। ताजमहल का रंग पिला पड़ गया था। ताजमहल पर भुरे और काले धब्बे पड़ रहे थे। इस वजह से यह बहुत ही चिंता का विषय बन गया था।
  • इस वजह से याचिकाकर्ता एम.सी.मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की और इसपर उपाय करने को और उचित निर्देश देने को कहां।

ताज ट्रेपेजियम केस का निर्णय या आदेश –

  • ताज ट्रेपेजियम केस में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के नियंत्रण बोर्ड ने इस केस के संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के लिए कहां।
  • उन्हें उन सभी फाउंड्रीज और उद्योगों का संकलन बनाना था जिसके वजह से संबंधित क्षेत्र में प्रदुषण में वृद्धि हो रही थी।
  • इसके बाद बोर्ड को ऐसे उद्योगों को नोटीस जारी करने के लिए कहां गया और यह दिखाने के लिए कहां गया की वह प्रदुषण को नियंत्रित रखने के लिए कौन कौनसे उपाय कर रहे हैं।
  • पांच सौ से ज्यादा उद्योगों को नोटीस दी गई और निर्धारित समय में जवाब देने को कहां गया। यह सब बोर्ड को दो स्थानीय समाचार पत्रों में और दो राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के लिए कहां गया और प्रदुषण नियंत्रण में रखने के लिए एक सार्वजनिक नोटीस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
  • राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान ने मथुरा रिफाइनरी में सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रण में रखने के लिए उपायों पर अपनी रिपोर्ट जारी की। मथुरा के मामले को न्यायालय द्वारा निपटाया गया था। जो रिपोर्ट जारी की गई थी उसमें अच्छे सल्फर रिकवरी युनिट को शामिल करने, हाइड्रोक्रैकिंग युनिट की स्थापना, प्राकृतिक गैस का उपयोग, रिफाइनरी के चारों तरफ हरित बेल्ट स्थापन करने की जानकारी दी गई है।
  • न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम को टीटीजेड के बाहर पर्याप्त क्षेत्रों की पहचान करने और उनका पता लगवाने के लिए कहां और उद्योगों को स्थानांतरित करने के लिए मदद के लिए भी प्रयास किए। सुप्रीम कोर्ट ने बहुत रिपोर्टों का विचार और विश्लेषण किया जो अदालत में पेश की गई थी। वर्धरंजन समिति के रिपोर्ट पर भी न्यायालय ने विचार किया और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य को एक पुनर्वास योजना बनवाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए जो उद्योगों को स्थानांतरित करने में मदद करेगी।
  • यह बात उल्लेखनीय हैं की सुप्रीम कोर्ट पर्यावरण कानून के संबंधित कुछ सिद्धांत जैसे की एहतियायी सिद्धांत, सतत विकास की अवधारणा और प्रदुषणकर्ता भुगतान सिद्धांत को मान्यता देने में विफल नहीं हुआ‌। भारतीय संविधान के अलग अलग अनुच्छेद और कानून जैसे की वायु प्रदुषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1981, जल प्रदुषण रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974, पर्यावरम संरक्षण अधिनियम 1986 पर भी विशेष जोर दिया गया।

FAQ

ताज ट्रेपेजियम केस क्या हैं ?

ताज ट्रेपेजियम केस ताजमहल से संबंधित महत्वपूर्ण केस हैं। 1984 में एमसी मेहता ताजमहल दौरा करने के लिए गए थे तब उन्होंने देखा की ताजमहल का संगमरमर पिला हो रहा हैं। इसलिए एमसी मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में ताजमहल के संबंधित याचिका दाखिल की थी।

ताज ट्रेपेजियम का क्षेत्र कितने किमी का हैं ?

ताज ट्रेपेजियम का क्षेत्र 10,400 वर्ग किमी का हैं।

याचिकाकर्ता एम.सी.मेहता के कहने के अनुसार ताजमहल को नुकसान किस वजह से हो रहा हैं ?

याचिकाकर्ता का कहना यह हैं की ताजमहल को नुकसान मथुरा के रासायनिक उद्योग, फाउंड्री और रिफाइनरी के वजह से हो रहा है। याचिकाकर्ता ने इस बात का उल्लेख किया की मथुरा रिफाइनरी और आसपास के उद्योगों से सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो रहा है इस वजह से ऍसिड वर्षा होती हैं। इस वजह से ताजमहल के सुंदरता को बिगाड़ने की मुख्य वजह उद्योगों के द्वारा उत्सर्जित प्रदुषक ही हैं।

एसिड वर्षा का ताजमहल पर क्या प्रभाव पड़ रहा था ?

एसिड वर्षा का ताजमहल के संगमरमर पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा हैं। ताजमहल का रंग पिला पड़ गया था। ताजमहल पर भुरे और काले धब्बे पड़ रहे थे। इस वजह से यह बहुत ही चिंता का विषय बन गया था।

इस पोस्ट में हमने आपको ताज ट्रेपेजियम का केस क्या है इसके बारे में जानकारी दी। हमारी पोस्ट शेयर जरुर किजिए। धन्यवाद !

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